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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले तुंगनाथ धाम के कपाट, भक्तिमय हुआ तृतीय केदार

देहरादून/रुद्रप्रयाग: देवभूमि उत्तराखंड में आज बाबा केदारनाथ के कपाट खुल चुके हैं. इस दौरान 10 हजार से अधिक श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी बने. केदारनाथ के साथ ही आज पंच केदारों में प्रतिष्ठित तुंगनाथ महादेव मंदिर के कपाट भी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खोल दिए गए हैं. सीएम धामी ने चारधाम एवं पंच केदार यात्रा पर देवभूमि उत्तराखंड पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं का हृदय से स्वागत, अभिनंदन और मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दी हैं.

भगवान तुंगनाथ के कपाट बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए हैं. इस पावन अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए 691 श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी बने. देर शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा. कपाट खुलने के शुभ अवसर पर तुंगनाथ धाम सहित सभी सहायक मंदिरों को लगभग 8 कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया. साथ ही चोपता एवं भुजगली में विशाल भंडारों का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया.

कपाटोद्घाटन से पूर्व प्रातः ब्रह्म बेला में चोपता स्थित भूतनाथ मंदिर में विद्वान आचार्यों द्वारा पंचांग पूजन के अंतर्गत विशेष अनुष्ठान संपन्न कर भगवान तुंगनाथ सहित तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का आवाहन किया. प्रातः 8 बजे भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली का भव्य श्रृंगार कर आरती उतारी गई. डोली को कैलाश के लिए रवाना किया गया.

भक्तों ने पुष्प और अक्षत अर्पित कर डोली की अगुवाई की तथा लाल-पीले वस्त्र चढ़ाकर अपनी मनोकामनाएं मांगीं. सुरम्य बुग्यालों में भक्तिमय वातावरण के बीच डोली ने नृत्य करते हुए प्रस्थान किया. लगभग 11 बजे डोली धाम पहुंची. मंदिर पहुंचने पर डोली ने मुख्य मंदिर की तीन परिक्रमा की तथा सहायक मंदिरों में शीश नवाया. इसके पश्चात वेद ऋचाओं और मंत्रोच्चारण के साथ भगवान तुंगनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए.

देहरादून निवासी सुरेंद्र असवाल एवं अगस्त्यमुनि निवासी धीर सिंह नेगी के सहयोग से मंदिर को पुष्पों से सजाया गया. लोक निर्माण विभाग ऊखीमठ और सामाजिक कार्यकर्ता नारायण दत्त जुयाल के नेतृत्व में भुजगली में तथा पालम, दिल्ली निवासी पंकज जिंदल द्वारा चोपता में विशाल भंडारों का आयोजन किया गया.

तुंगनाथ मंदिर की विशेषता: तुंगनाथ धाम हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. तुंगनाथ तृतीय केदार के रूप में जाना जाता है. तुंगनाथ धाम अपनी दिव्यता, प्राचीनता और आध्यात्मिक आभा के लिए विश्वविख्यात है. पंचकेदारों में तृतीय स्थान रखने वाला यह पवित्र धाम भगवान शिव की भुजाओं (बाहुओं) के रूप में पूजित है. मान्यता है कि महाभारत युद्ध के पश्चात पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां कठोर तप किया था, जिससे यह स्थल विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है.

तुंगनाथ मंदिर पत्थरों की अद्भुत स्थापत्य शैली का अनुपम उदाहरण है, जिसे आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्स्थापित किया गया माना जाता है. मंदिर के गर्भगृह में स्थापित स्वयंभू शिवलिंग श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है. हर वर्ष ग्रीष्मकाल में हजारों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्ग पार कर यहां पहुंचते हैं और भगवान तुंगनाथ के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं.

तुंगनाथ धाम से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंद्रशिला शिखर ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है. लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई से चौखम्भा, नंदा देवी, त्रिशूल, केदारनाथ सहित अनेक हिमालयी चोटियों का विहंगम दृश्य यहां से देखा जा सकता है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य अत्यंत मोहक और अविस्मरणीय होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने लंका विजय के पश्चात यहां तपस्या की थी, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है.

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