देहरादून: आज केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं. सीएम धामी ने पहली पूजा पीएम मोदी के नाम से की है. चारधाम यात्रा के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और तीर्थयात्रियों को शुभकामनाएं दी. साथ ही उन्होंने इसे भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का भव्य उत्सव बताया. केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिमालय की गोद में बसे बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त करने वाले जीवंत प्रतीक भी हैं.
उन्होंने कहा कि सदियों से विभिन्न परंपराओं और संस्कृतियों के लोग यहां पहुंचकर आध्यात्मिक एकता का अनुभव करते आए हैं, और यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में उत्तराखंड की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की अहम भागीदारी है.
उन्होंने अपने पूर्व वक्तव्य को दोहराते हुए कहा कि यह दशक उत्तराखंड का दशक बन रहा है, जो अब धरातल पर दिखाई भी दे रहा है. राज्य में पर्यटन, आध्यात्मिकता और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हुए विकास ने चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बना दिया है. इससे न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिल रही है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है.

पीएम मोदी की संदेश (@PMO)
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने तीर्थ यात्रियों से ‘डिजिटल उपवास’ अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर प्रकृति और आध्यात्मिकता को महसूस करने का प्रयास करें. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण में समय बिताने से आत्मिक संतुष्टि की अनुभूति होती है, जो इस यात्रा का वास्तविक उद्देश्य है.
उन्होंने सेवा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने सहयात्रियों की मदद करने और देशभर से आए लोगों के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव बनाने पर भी जोर दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने के लिए यात्रियों से अपने कुल खर्च का कम से कम पांच प्रतिशत स्थानीय उत्पादों पर खर्च करने की अपील की.
उनका कहना था कि इससे स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा. साथ ही उन्होंने अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन करने की भी बात कही, ताकि यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो सके और व्यवस्थाओं में लगे लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
अंत में प्रधानमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स और इंफ्लूएंसर्स से भी अपील की कि वे उत्तराखंड की स्थानीय परंपराओं, लोककथाओं और अनदेखे पहलुओं को देश-दुनिया तक पहुंचाएं ताकि देवभूमि की सांस्कृतिक समृद्धि को और व्यापक पहचान मिल सकें.

