सीमांत क्षेत्रों के लिए क्षेत्र-विशेष विकास का रोडमैप तैयार
भारत-नेपाल सीमा पर विकास पर मंथन
देहरादून: गृह मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखण्ड सरकार ने सिविल सर्विसेज इंस्टिट्यूट, देहरादून में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्घाटन अपर सचिव ग्राम्य विकास अनुराधा पाल ने किया। मंत्रालय की ओर से प्रदीप पाण्डेय, डीसी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम उपस्थित रहे।
अपर सचिव अनुराधा पाल ने बताया कि अप्रैल 2025 में शुरू हुए इस शत प्रतिशत सेन्ट्रल सेक्टर कार्यक्रम के तहत पिथौरागढ़, चम्पावत और ऊधमसिंह नगर के कुल 40 सीमांत गांवों को चुना गया है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य –
वीवीपी-॥ के तहत योजनाओं के विकास संबंधी जानकारी साझा करना ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आजीविका प्रदान हो, बुनियादी अवसंरचना विकसित हो और क्षेत्र में पलायन रोका जा सके। इसमें लोगों को पुख्ता सहायता देने तथा लाभार्थियों को योजनाओं के अनुरूप अलग-अलग प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर लक्षित समूहों को योजनाओं के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। लक्षित विकासखंडों में रहने वाले लोगों की विकासात्मक आवश्यकताओं और कल्याण को पूरा करना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों की विशेष चुनौतियों के लिए क्षेत्र-विशेष रणनीतियाँ तैयार करना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।
कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय लोगों के माध्यम से सीमा सुरक्षा बलों के लिए आवश्यक समर्थन सुनिश्चित करने बेहतर जीवन स्तर और पर्याप्त आजीविका के अवसर प्रदान करने पर जोर दिया गया।

योजनाओं की तीन मुख्य धारणाएँ हैं जिसमें सभी पात्र परिवारों तक केंद्र और राज्य की योजनाओं का लाभ पहुँचाना, सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास तथा पर्यटन, कृषि, स्वरोजगार और कौशल विकास के माध्यम से आजीविका सृजन करना है।
श्रीमती पाल ने विशेष रूप से कौशल विकास पर ज़ोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि वीवीपी गांवों से ऐसे युवाओं का चिन्हांकन किया जाए जो स्वरोजगार या रोजगार के इच्छुक हों और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
वीवीपी.2 के अंतर्गत भारत नेपाल सीमा से सटे 40 गांवों के लिए मुख्यतः आजीविका विकास, सड़क संपर्क, मूलभूत अवस्थापना, विद्युतीकरण, दूरसंचार, पर्यटन व संस्कृति, कौशल विकास, सहकारिता एवं शिक्षा संबंधी घटकों से संतृप्ति सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सभी 40 गांवों का सत्यापन कर पोर्टल पर अपलोड कर दिया हैय साथ ही तीनों जनपदों के 6 सीमांत विकासखंडों के 964 गांवों का भी सत्यापन और पोर्टल अपलोड पूरा किया जा चुका है। वर्तमान में जनपद स्तर पर योजनाओं का निर्माण कर अपलोड किये जाने की प्रक्रिया गतिमान है।
कार्यशाला में सहायक नोडल अधिकारी- वीवीपी डॉ. प्रभाकर बेबनी ने राज्य में वीवीपी योजना की प्रगति पर अवगत कराया तथा जनपदों से योजनाओं के अपलोड करने की प्रक्रिया के संबंध में जनपदों से विस्तृत जानकारी साझा की।
भारत सरकार की टीम और एनआईसी ने ऑनलाइन जुड़कर तकनीकी सहायता प्रदान की। पर्यटन, कृषि, उद्यान, कौशल विकास, पीएमजीएसवाई और सहकारिता सहित विभिन्न रेखीय विभागों के अधिकारियों ने भी संबंधित योजनाओं की जानकारी पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। एसएसबी के आईजी द्वारा भी इस अवसर पर एक प्रस्तुतिकरण दिया गया जिसमें स्थानीय लोगो तथा बीजीएफ के साथ समन्वय पर सुझाव दिये गये ।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

