Friday, March 27, 2026
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गरीबों, दलितों व वंचितों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना वर्तमान सरकार की है प्राथमिकता: रेखा आर्या

सोमेश्वर(अल्मोड़ा): उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री व सोमेश्वर विधायक रेखा आर्या ने बस्ती जनसंपर्क अभियान के तहत अपनी सोमेश्वर विधानसभा स्थित कंडारकुआं और मंडल ताकुला के ग्रामसभा कांडे में रमेश राम(रामी राम) जी के आवास पर एससी बाहुल्य बस्ती मे जनसम्पर्क किया।कार्यक्रम से पूर्व संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा पर माल्यापर्ण किया गया।इस दौरान कैबिनेट मंत्री ने सभी ग्रामवासियों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जनकल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराया।

उन्होंने कहा कि आज भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार लगातार जनहित में कार्य कर रही है जिसके कारण गरीब उत्थान व कल्याण का संकल्प सिद्ध हो रहा है।इस असोज जैसे व्यस्ततम माह के दौरान भी जिस प्रकार से आप सभी देवतुल्य जनता अपना कीमती समय निकालकर उपस्थित हुए हैं, यह आप सभी का प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के प्रति स्नेह व प्रेम को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोद ने बाबा साहब से जुड़े 05 स्थलों को ‘पंच-तीर्थ’ के रूप में जिनमें मध्य प्रदेश में उनका जन्म स्थान महू छावनी, लंदन का वह घर, जहां उन्होंने पढ़ाई की, नागपुर में दीक्षा भूमि, दिल्ली में महापरिनिर्वाण स्थल व मुम्बई में चैत्य भूमि को स्थापित किया है।निश्चित रूप से ‘पंच-तीर्थ’ स्थलों के माध्यम से लोगों को बाबा साहब डॉ. अंबेडकर जी की दृष्टि एवं विचारों को जानने एवं समझने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर जी ने कहा था कि राजनीतिक लोकतंत्र के आधार में अगर सामाजिक लोकतंत्र नहीं होगा तो यह टिक नहीं सकता।उन्होंने कहा कि समावेश के साथ सामाजिक न्याय हमारे संविधान की प्रमुख विशेषता है और सरकार का फोकस भी गरीबों और पिछड़ों पर है।आज प्रधानमंत्री ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न रोकथाम कानून को उपयुक्त संशोधनों के जरिए मजबूत बनाया है जो गरीबों के प्रति उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है,आज प्रधानमंत्री द्वारा गरीब कल्याण हेतु “प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना” शुरु की गई जिसके लाभ निश्चित रूप से गरीब तबके को होगा।”विश्वकर्मा योजना” के अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी भारत के 18 पारंपरिक व्यवसायों को नया जीवन दिया जाएगा,इनमें कुम्हार, बढ़ई, लोहार, सुनार, दर्जी, मोची, नाई, मूर्तिकार आदि के साथ नाव बनाने वाले कारीगर भी शामिल हैं! ये वे उद्यम हैं जो एक विशेष तरह के हुनर और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित हैं और गरीबों, दलितों व वंचितों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना वर्तमान सरकार की प्राथमिकता है।आजादी के बाद भी जिन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा प्राप्त नहीं था और यहां के लोगों को वोट देने का भी अधिकार नहीं था, उन्हें हमारी सरकार ने यह अधिकार प्रदान किया।

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