spot_imgspot_img
Homeउत्तराखंडऋषिकेश महायोजना–2031: पर्यटन और शहरी विकास में संतुलन के साथ आधुनिक शहर...

ऋषिकेश महायोजना–2031: पर्यटन और शहरी विकास में संतुलन के साथ आधुनिक शहर का निर्माण

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के तहत ऋषिकेश महायोजना–2031 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

इसी क्रम में सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में तीन जनपदों—टिहरी, पौड़ी और देहरादून—से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया। सरकार का उद्देश्य इस महायोजना के माध्यम से ऋषिकेश को एक सुनियोजित, व्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना है, जहां पर्यटन और शहरी विकास में संतुलन बना रहे।

तपोवन बना चर्चा का केंद्र, अवैध निर्माण बड़ी चुनौती
बैठक के दौरान सबसे अधिक फोकस तपोवन क्षेत्र पर रहा, जो टिहरी विकास प्राधिकरण के अधीन आता है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2011 की पूर्व महायोजना के बाद इस क्षेत्र में अनियोजित और अवैध निर्माण तेजी से बढ़े हैं। होटल, गेस्ट हाउस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के अनियंत्रित विस्तार ने न केवल क्षेत्र की भौगोलिक संरचना को प्रभावित किया है, बल्कि यातायात, पार्किंग और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ाया है। इसके चलते स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

महायोजना–2031 में समाधान का रोडमैप तैयार
मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक द्वारा प्रस्तुत किए गए प्लान में इन समस्याओं के समाधान के लिए कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। जिन क्षेत्रों में पहले से होटल और व्यावसायिक गतिविधियां विकसित हो चुकी हैं, उन्हें ‘पर्यटन उपयोग क्षेत्र’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इससे न केवल मौजूदा ढांचे को वैधता और संरचना मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, भविष्य में अनियोजित निर्माण पर रोक लगाने के लिए सख्त नियामक प्रावधान भी जोड़े गए हैं।

जनसुनवाई के बाद संशोधन, अब अंतिम चरण में योजना
अधिकारियों ने जानकारी दी कि महायोजना को पहले संबंधित प्राधिकरण बोर्डों से अनुमोदन मिल चुका है और इसके बाद इसे जनसुनवाई एवं प्रदर्शनी की प्रक्रिया से भी गुजारा गया। जनसुझावों के आधार पर इसमें संशोधन किए गए और फिर इसे शासन स्तर पर भेजा गया। शासन द्वारा पुनर्विचार के बाद इसे एक बार फिर संबंधित बोर्डों को भेजा गया, जहां से इसे अनुमन्य कर दिया गया है। अब योजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

तीन जिलों का समन्वय, 15 दिन में सुझाव होंगे एकत्र
ऋषिकेश महायोजना–2031 तीन जनपदों में फैली हुई है—टिहरी, पौड़ी और देहरादून। इनमें से दो जिलों ने योजना को स्वीकृति दे दी है, जबकि पौड़ी जनपद ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इन्हीं सुझावों पर विचार करने के लिए सचिव स्तर पर विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी जिलों से प्राप्त सुझावों को 15 दिनों के भीतर समेकित कर शासन को प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि महायोजना को जल्द अंतिम रूप दिया जा सके।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल
इस महायोजना के लागू होने से ऋषिकेश में पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। सुनियोजित विकास के माध्यम से जहां एक ओर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार का मानना है कि यह योजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक के अंत में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि सभी संबंधित विभागों के समन्वय से ऋषिकेश महायोजना–2031 को शीघ्र लागू किया जाएगा। इसके लागू होने से न केवल शहर की आधारभूत संरचना मजबूत होगी, बल्कि ऋषिकेश को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा।

जल्द लागू होगी महायोजना, विकास को मिलेगी नई दिशा- डॉ. आर राजेश कुमार
सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि ऋषिकेश महायोजना–2031 राज्य के लिए एक दूरदर्शी योजना है, जो आने वाले वर्षों में विकास की दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आपत्तियों और सुझावों का शीघ्र निस्तारण करते हुए महायोजना को अंतिम रूप दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि तपोवन जैसे क्षेत्रों में जो अव्यवस्थित विकास हुआ है, उसे सुधारने के लिए इस बार ठोस प्रावधान किए गए हैं, जिससे भविष्य में संतुलित और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।

RELATED ARTICLES

-VIDEO ADVERTISEMENT-

- Advertisment -spot_imgspot_img

Most Popular