Thursday, March 19, 2026
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उत्तराखंड में हरेला पर्व बना हरित क्रांति का उत्सव, 8 लाख से अधिक पौधे रोपे

‘एक पेड़ माँ के नाम’ से ‘धरती माँ का ऋण चुकाओ’ तक: हरेला पर्व बना जनआंदोलन

देहरादून: उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक हरेला पर्व अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का सशक्त अभियान बन चुका है। इस वर्ष पर्व के अवसर पर पूरे राज्य ने एक नया इतिहास रचा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शुरू हुए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘हरेला का त्योहार मनाओ, धरती माँ का ऋण चुकाओ’ जैसे सार्थक संदेश से और व्यापक रूप दिया।

मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून में स्वयं पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की और इसे केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर जन-जन की भागीदारी वाला हरित जनांदोलन बना दिया। प्रदेश के सभी 13 जिलों के गांवों, कस्बों, शहरों और स्कूलों में हजारों स्थानों पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित हुए। स्थानीय प्रशासन, वन विभाग, स्वयंसेवी संगठन, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, महिला समूह और युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ इसमें हिस्सा लिया। अब तक पूरे राज्य में 8 लाख 13 हजार से अधिक पौधे रोपे जा चुके हैं, जो किसी एक पर्व पर अब तक का सबसे बड़ा वृक्षारोपण प्रयास है।

यह केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ऐसी पहल है जो प्रदेशवासियों में प्रकृति के प्रति आस्था, जिम्मेदारी और संरक्षण की भावना को और गहरा कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व बताता है कि उत्तराखंड केवल हिमालयी राज्य नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए जागरूक और सक्रिय समाज का प्रतीक है।

उन्होंने यह भी कहा कि हरेला अब केवल सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि प्रदेशवासियों की सामूहिक चेतना का उत्सव बन चुका है। धरती में जो बीज आज रोपे जा रहे हैं, वे हरियाली, उम्मीद और सतत विकास के प्रतीक हैं। आने वाले वर्षों में यही बीज एक हरित, समृद्ध और पर्यावरण-संवेदनशील उत्तराखंड की नींव बनेंगे।

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