Tuesday, January 13, 2026
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Homeउत्तराखंडराजकीय मेडिकल कॉलेजों को मिलेंगे 587 नये नर्सिंग अधिकारी

राजकीय मेडिकल कॉलेजों को मिलेंगे 587 नये नर्सिंग अधिकारी

उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने जारी की भर्ती विज्ञप्ति

रंग ला रही है विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की पहल

देहरादून: चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग अधिकारियों के रिक्त 587 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने इसके लिये भर्ती विज्ञापन जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। उक्त भर्ती हेतु ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 17 दिसम्बर 2025 निर्धारित की है।

सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण व विस्तारीकरण को लेकर खासी संजीदा है। सरकार आम लोगों को उच्च गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये न सिर्फ आधुनिक चिकित्सा संसाधन उपलब्ध करा रही है बल्कि मानव संसाधनों की भी तीव्र गति से पूर्ति कर रही है। उन्होंने बताया कि बीते एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत 287 चिकित्सकों तथा 180 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (महिला) के रिक्त पदों पर राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इसी क्रम में आज (सोमवार) चयन बोर्ड ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग अधिकारियों के रिक्त 587 पदों पर भर्ती विज्ञप्ति जारी कर अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे हैं। जिसमें राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार व पिथौरागढ़ के रिक्त 480 पद तथा बैकलॉग के 107 पद शामिल हैं।

विभागीय मंत्री ने बताया कि नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती के लिये ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 27 नवम्बर 2025 से शुरू होगी जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 17 दिसम्बर 2025 निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि उक्त भर्ती के तहत नर्सिंग अधिकारी (महिला) डिप्लोमाधारक के लिये 336 पद निर्धारित किये गये हैं। इसी प्रकार नर्सिंग अधिकारी (महिला) डिग्रीधारक के लिये 144 पद जबकि नर्सिंग अधिकारी (पुरूष) डिप्लोमाधारक 75 तथा नर्सिंग अधिकारी (पुरूष) डिप्लोमाधारक के लिये 32 पद विज्ञापित किये गये हैं।

डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि नर्सिंग अधिकारियों के 587 पदों पर नियुक्ति से राजकीय मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सुविधाएँ और अधिक सुदृढ़ होंगी। इससे उपचार प्रक्रियाएँ न केवल तत्पर और प्रभावी बनेंगी, बल्कि मरीजों की देखभाल में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

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