Thursday, March 5, 2026
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उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र में महिला सशक्तिकरण विषय पर आज एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया

देहरादून: उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के सभागार में आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण विषय पर आज एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । यूसैक सभागार में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं को अंतरिक्ष तकनीक RS/GIS, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एवं ड्रोन तकनीक जैसी आधुनिक तकनीक से जोड़ कर उन्हें शैक्षणिक एवं व्यावसायिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना है ।
कार्यशाला में अतिथियों के रूप में महिला आयोग कि अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल, डॉ मीरा तिवारी- पूर्व निदेशक, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान,देहरादून, शिक्षाविद प्रो० रीमा पंत, एवं वैज्ञानिक डॉ पूनम गुप्ता ने प्रतिभाग किया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ आमंत्रित अतिथियों एवं केंद्र के निदेशक प्रो० दुर्गेश पंत ने दीप प्रज्वलित कर किया । केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अरुण रानी द्वारा स्वागत सम्बोधन प्रस्तुत करते हुए RS/GIS, AI और ड्रोन तकनीक महिलाओं को किस प्रकार सशक्त बना रही हैं, इस विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया गया।
कार्यशाला में यूसैक के निदेशक एवं महानिदेशक यूकॉस्ट प्रोo दुर्गेश पंत ने कहा कि वर्तमान समय में आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिलाओं के लिए रोजगार, नवाचार, कौशल विकास एवं नेतृत्व के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं । आधुनिक युग में तकनीक ने समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है । विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तकनीक एक मजबूत माध्यम बन कर उभरी है । सूचना, संचार प्रौद्योगिकी इंटरनेट,डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया ने महिलाओं को नई पहचान, अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान की है । AI आधारित प्लेटफ़ॉर्म महिलाओं को रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं । मोबाइल हेल्थ ऐपस, टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन परामर्श से महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से मिल रही हैं । साथ ही सेफ़्टी ऐप, GPS और हेल्पलाइन नंबर महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं ।
कार्यशाला की मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को निर्णय निर्माण, नेतृत्व और शासन के हर स्तर पर समान अवसर,अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराना । प्रशासनिक सेवाओं और लीडरशिप में महिलाओं की भागीदारी न केवल लैंगिक समानता को बढ़ाती है, बल्कि शासन की गुणवत्ता,संवेदनशीलता और प्रभावशीलता को भी सुदृढ़ करती है । वर्तमान समय में प्रशासनिक सेवाओं एवं राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिती से नीति-निर्माण में शिक्षा, स्वास्थ्य,पोषण,महिला-बाल सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को प्राथमिकता मिली है।
आधुनिक तकनीकी के माध्यम से वर्तमान समय में सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों के माध्यम से महिलाएं अपने अधिकारों, समस्याओं और उपलब्धियों को खुलकर व्यक्त कर पा रही हैं । यह मंच सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने का सशक्त माध्यम बना है ।
कार्यशाला के अति विशिष्ट अतिथि मशहूर फिल्म अभिनेता श्री दिलीप ताहिल थे। अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि फिल्मी दुनिया में तकनीकी विकास ने महिलाओं को सशक्त बन्नाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । डिजिटल कमेरा, एडिटिंग सॉफ्टवेयर, वीएफ़एक्स और ओटीटी प्लाटफॉर्म्स ने महिलाओं को निर्देशक,लेखक,सिनेमेटोग्राफर और निर्माता के रूप में नए अवसर दिए हैं। तकनीक के माध्यम से अब महिलाएं अपनी कहानियाँ स्वयं कह रहीं हैं और पारंपरिक सीमाओं से बाहर आकार सशक्त महिला पात्रों को दर्शकों तक पहुँचा रही हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने उनकी आवाज को वैश्विक पहचान दिलाई है, जिससे फिल्म जगत में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिला है ।
विशिष्ट अतिथि वैज्ञानिक डॉ पूनम गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीकी के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म,डिजिटल क्लासरूम और मोबाइल ऐप के माध्यम से आज महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुँच आसान बनी है। दूर-दराज क्षेत्र की महिलाएं भी अब घर बैठे कौशल विकास और उच्च सिक्षा प्राप्त कर सकती है ।
विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद प्रोo रीमा पंत ने कहा कि आज के तकनीकी युग में डिजिटल प्लेटफॉर्म महिलाओं को अपनी आवाज उठाने, नेटवर्क बनाने और नेतृत्व में आगे बढ़ने का अवसर देते हैं । ई- गवर्नेंस और सोशल मीडिया के जरिए महिलाएं नीति-निर्माण और सामाजिक बदलाव में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं । उन्होंने कहा कि तकनीक महिला सशक्तिकरण की कुंजी है, यदि समान पहुँच, प्रशिक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तो तकनीक के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर, सशक्त और नेतृत्वकारी भूमिका में उभर सकती है जो समावेशी और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण है । कार्यशाला में डी०ए०वी० पी०जी० कॉलेज की एन०सी०सी० की छात्राओं, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान देहरादून की छात्राओं तथा यूसैक के वैज्ञानिक कार्मिक एवं शोधार्थियों ने भाग लिया। कार्यशाला में डॉ नीलम रावत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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