उत्तराखण्ड में करनी पड़ी बिजली रोस्टरिंग
यूपीसीएल ने कहा, हालात सामान्य, उपभोक्ताओं से सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील
देहरादून: उत्तराखण्ड में 31 जुलाई की शाम से 1 अगस्त की देर रात तक बिजली उत्पादन इकाइयों में आए अचानक तकनीकी व्यवधान और नदियों में अत्यधिक सिल्ट के कारण करीब 560 मेगावाट विद्युत उत्पादन प्रभावित हो गया। उत्पादन में आई इस अप्रत्याशित कमी के चलते प्रदेश के विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं को सीमित अवधि के लिए विद्युत रोस्टरिंग का सामना करना पड़ा।
यूपीसीएल के अनुसार 31 जुलाई को शाम 7:30 बजे से 1 अगस्त को रात 1:10 बजे तक बिजली मांग और उपलब्धता के बीच असंतुलन की स्थिति बनी रही। एपीएल रायगढ़ की 350 मेगावाट क्षमता वाली इकाई में स्टीम लीकेज, व्यासी जलविद्युत परियोजना (120 मेगावाट) तथा चिल्ला जलविद्युत परियोजना (88 मेगावाट) में नदियों के पानी में अत्यधिक सिल्ट (उच्च पीपीएम) के कारण उत्पादन बाधित हो गया। इससे कुल लगभग 560 मेगावाट बिजली उत्पादन उपलब्ध नहीं हो सका।
निगम ने बताया कि इस दौरान ऊर्जा एक्सचेंजों से अतिरिक्त बिजली खरीदने के हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन एक्सचेंजों में भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं होने के कारण आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जा सकी। ऐसे में ग्रिड की सुरक्षा और विद्युत व्यवस्था के संतुलित संचालन के लिए सीमित अवधि की रोस्टरिंग लागू करना अनिवार्य हो गया।
यूपीसीएल ने स्पष्ट किया कि निगम प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और यथासंभव 24×7 निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, तकनीकी खराबी अथवा प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण कभी-कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जब बिजली उपलब्धता प्रभावित होती है और सुरक्षित संचालन के लिए अस्थायी रोस्टरिंग लागू करनी पड़ती है।
निगम ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बिजली व्यवस्था को शीघ्र सामान्य करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाते हैं तथा उपभोक्ताओं से सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील की है।


