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12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: बुनकरों के सम्मान, पेंशन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक पहल

12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: बुनकरों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक पहल

भरत सिंह चौधरी के आग्रह पर वरिष्ठ असमर्थ हस्तशिल्पियों के लिए पेंशन योजना की घोषणा, खादी और स्थानीय उत्पादों को मिला प्रोत्साहन।

देहरादून: उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद (UHHDC), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, उत्तराखण्ड सरकार के तत्वावधान में आज मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास में 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि तथा कैबिनेट मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों, बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हथकरघा उद्योग उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। राज्य सरकार बुनकरों की आय बढ़ाने, पारंपरिक शिल्प के संरक्षण तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने युवाओं से हथकरघा एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र से जुड़कर स्वरोजगार के नए अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि उत्तराखण्ड का हथकरघा उद्योग राज्य की सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है। सरकार बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर डिज़ाइन, कौशल प्रशिक्षण तथा विपणन सुविधाओं के विस्तार पर विशेष बल दे रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के लक्ष्य को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी के आग्रह पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने 60 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे हस्तशिल्पियों एवं बुनकरों, जो शारीरिक रूप से कार्य करने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए पेंशन योजना प्रारम्भ करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने मंच से ही अधिकारियों को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कैबिनेट मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि प्रदेश के अनेक वरिष्ठ हस्तशिल्पी एवं बुनकरों ने अपने जीवनभर की साधना से उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखा है। ऐसे कारीगरों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे हजारों हस्तशिल्पी एवं बुनकर परिवारों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

समारोह के दौरान कैबिनेट मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी ने परिषद द्वारा आयोजित हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न स्टॉलों से स्वयं खादी के वस्त्र खरीदकर ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश दिया। उन्होंने प्रदेशवासियों से खादी एवं स्थानीय उत्पादों के अधिकाधिक उपयोग की अपील करते हुए कहा कि इससे बुनकरों और कारीगरों की आय में वृद्धि होगी तथा उत्तराखण्ड की पारंपरिक कला को नई पहचान मिलेगी।

कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कैंट विधायक श्रीमती सविता कपूर, राज्य मंत्री श्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल, राज्यमंत्री श्री गोविंद सिंह, सचिव श्री विनय शंकर पांडे, उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के अधिकारी, विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी, बुनकर, हस्तशिल्पी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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