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कोरोना वैक्सीन से हार्ट अटैक-ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में मानी खामियां

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बारे में कौन नहीं जानता है। इसने पूरी दुनिया को हिला के रख दिया था। कोरोना महामारी से लड़ने के वैक्सीनेशन का अभियान चला। हर देश ने अपने नागरिकों के लिए कोरोना की वैक्सीन का इंतजाम करवाया। वहीं फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने स्वीकारा है कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन का कुप्रभाव हो सकता है। जिसके कारण शरीर में खून के थक्के पड़ सकते हैं।

इसके कारण हार्ट अटैक का खतरा भी बना रहता है

फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ मिलकर कोविड-19 की वैक्सीन बनाई थी। एक विदेशी रिपोर्ट के अनुसार इस वैक्सीन के कुप्रभाव के कारण एक व्यक्ति एमी स्कॉट ने पिछले साल कोर्ट में मुक़दमा दायर कर दिया था। व्यक्ति का कहना था कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लेने के बाद उनके शरीर में खून के थक्के जम गए थे। यह कोई अकेला मामला नहीं है। कोर्ट में इस तरह के 51 मामले दर्ज हुए हैं। पीड़ितों ने कोर्ट में मुआवजे में 100 मिलियन पाउंड तक की मांग रखी है। वैक्सीन के कारण ब्लड क्लॉट होने की वजह से इन लोगो ने यह मांग की है। इसके कारण हार्ट अटैक का खतरा भी बना रहता है।

हमारे देश में भी इस वैक्सीन से लोगों का वैक्सीनेशन हुआ है

फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने मई 2023 में स्कॉट के वकीलों के सामने दलील रखी थी कि वे स्वीकारते हैं टीटीएस इस वैक्सीन के कारण होता है। बता दें कि टीटीएस के कारण खून के थक्के बन जाते है। जिसे ब्लड क्लॉट भी कहा जाता है। जिससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक आने का खतरा बना रहता है। फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने फरवरी 2024 में उच्च न्यायालय को सौंपे डाक्यूमेंट्स में दलील दी है कि वैक्सीन कुछ जगह टीटीएस का कारण बन सकती है। बताना चाहेंगे कि एस्ट्राजेनेका ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ साझेदारी करके भारत सरकार को वैक्सीन की आपूर्ति की थी। हमारे देश में भी इस वैक्सीन से लोगों का वैक्सीनेशन हुआ है।

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