Saturday, March 21, 2026
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Homeउत्तराखंडचेतावनी के बाद दर्जनों कश्मीरी छात्र-छात्राओं ने दून छोड़ा

चेतावनी के बाद दर्जनों कश्मीरी छात्र-छात्राओं ने दून छोड़ा

जम्मू कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन ने हालात की जानकारी ली

देखें, हिंदूवादी संगठन की चेतावनी पर क्या बोले एसएसपी

देहरादून: जम्मू कश्मीर के पर्यटक स्थल पहलगाम में बुधवार को हुए आतंकवादी हमले के बाद इसकी तीखी प्रतिक्रिया उत्तराखंड के हिंदूवादी संगठनों की ओर से भी देखने को मिली है l पुष्ट जानकारी के मुताबिक 36 छात्र छात्राएं हिंदूवादी संगठनों की धमकियों के बाद बुधवार रात और शुक्रवार सुबह हवाई , रेल और सड़क मार्ग से राज्य से पलायन कर चुके हैं l

देहरादून में स्थिति वहां से भड़की जब हिंदू रक्षा दल के उत्तराखंड में नेता ललित शर्मा ने सोशल मीडिया पर यह चेतावनी भरा पोस्ट प्रसारित किया, जिसमें वह कश्मीरी छात्र-छात्राओं को चेतावनी भरे अंदाज में यह आगाह कर रहे हैं कि, ” गुरुवार सुबह 10:00 बजे तक शहर छोड़ दो, वरना उनके साथ भी वैसा ही बर्ताव किया जाएगा जैसा कि किया जाना चाहिए”।

हालांकि,पुलिस ने तत्काल सोशल मीडिया से इस पोस्ट को हटवा दिया है l इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने शहर के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं, विशेष कर, जहां जम्मू कश्मीर से मुस्लिम छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक है, वहां का दौरा किया और स्कूल प्रबंधन को सख़्त हिदायत दी कि इन छात्रों की हिफाजत का खास ख्याल रखा जाए l

जम्मू कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहामी ने बताया,”देहरादून में वर्तमान में 2000 से अधिक जम्मू कश्मीर के स्टूडेंट यहां अध्यनरत है. मेरी जानकारी के मुताबिक 36 छात्र-छात्राएं हिंदूवादी संगठनों के इन भड़काऊ बयानों की वजह से बीते 24 घंटे में राज्य से अपने घरों के लिए पलायन कर गए हैं l
डीजीपी दीपम सेठ से हुई बातचीत का हवाला देते हुए स्टूडेंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय कन्वीनर ने बताया, “देहरादून के प्रेम नगर, सुद्दोवाला, सेलाकुई, नन्दा की चौकी आदि क्षेत्रों में स्थित शिक्षण संस्थानों के प्रशासन से बातचीत करने के बाद उनको पूरी सुरक्षा देने के लिए आश्वासन दिया गया है”.

एसएसपी ने इसके तत्काल बाद सेलाकुई वह आसपास के क्षेत्र में संबंधित हॉस्टल में संभावित रिहायशी इलाकों का भी तत्काल दौरा किया.

स्टूडेंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय कन्वीनर ने बताया,”भड़काऊ बयान के बाद हमारे छात्र कुछ डरे हुए से हैं, सरकार जब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाती और यह आश्वस्त नहीं करती कि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी तब तक हमें विश्वास नहीं होगा “.

गौरतलब है कि 2019 में भी पुलवामा हमले के बाद देहरादून से बड़ी तादाद में जम्मू कश्मीर के छात्र-छात्राएं, जो यहां विभिन्न कॉलेजों में पढ़ रहे थे बड़ी संख्या में उनमें से पलायन कर गए थे उसे वक्त यहां कश्मीरी छात्र छात्राओं की संख्या लगभग 5000 के करीब थी जो कि फिर दोबारा कभी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई l

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