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धामी सरकार का बड़ा कदम, गिरोहबंद, समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण विधेयक पास, गैंगस्टर के दायरे में आए 14 एक्ट

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देहरादून: विधानसभा में बृहस्पतिवार को उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण) संशोधन विधेयक को सरकार ने ध्वनिमत के साथ पारित करा लिया। आईटी एक्ट और उत्तराखंड चिट फंड अधिनियम जैसे करीब 14 कानून गैंगस्टर के दायरे में होंगेसंसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल ने मंगलवार को सदन पटल पर पांच विधेयक रखे थे। जिनमें से बुधवार को चार को पारित करा लिया गया था। गैंगस्टर एक्ट में संशोधन को लेकर आए विधेयक के कानून बनने के बाद ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीकों से लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने वालों के खिलाफ कानून के हाथ और मजबूत हो जाएंगे।

लाखों करोड़ों ठगने वाले इन अपराधियों पर भी गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की जा सकेगी। इसके दायरे में लाए गए अपराधों में पकड़े जाने वाले लोगों को आसानी से जमानत नहीं मिल पाएगी। दोषी पाए जाने पर उन्हें लंबे समय तक जेल की हवा खानी पड़ेगी। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) का चलन बढ़ने के बाद इसके संभावित खतरों से निपटने के लिए वर्ष 2000 में आईटी एक्ट बनाया गया था।ऐसा कोई भी अपराध जिसमें कंप्यूटर, मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रानिक संसाधनों का प्रयोग हुआ, उसमें आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है, लेकिन इस कानून में अधिक से अधिक सजा ही केवल पांच साल है। दूसरा इसकी विवेचना भी केवल इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी कर सकता है।

सजा सात साल से कम है, तो इसमें गिरफ्तारी भी नहीं हो सकती, जबकि वर्तमान में आईटी एक्ट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बीते कुछ सालों में उत्तराखंड राज्य में जितने अपराध आईपीसी से संबंधित हैं, उससे कहीं ज्यादा आईटी एक्ट के तहत दर्ज किए जाते हैं। बार-बार अपराध करने पर भी अपराधियों पर शिकंजा नहीं कसा जा सकता था। राज्य में किट्टी कमेटी संचालित कर लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने के मामले भी एकाएक बढ़े हैं, मगर इनमें भी चिट फंड अधिनियम के तहत होती है।इस एक्ट में भी सजा का प्रावधान कड़ा न होने से अपराधी आसानी से जेलों से बाहर आ जाते हैं। इन दोनों अपराधों को गैंगस्टर एक्ट के दायरे में लाया गया है।

ये अधिनियम गैंगस्टर विधेयक का बने हिस्सा
साहूकारी विनियमन अधिनियम 1976।
गोवध निवारण अधिनियम 1955 और पशुओं के प्रति क्रूरता अधिनियम 1960।
वाणिज्यिक शोषण, बंधुआ श्रम, बाल श्रम, यौन शोषण, अंग हटाने, भिक्षावृत्ति।
विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1966।
जाली भारतीय करेंसी नोट का मुद्रण, परिवहन और परिचालन करना।

नकली दवाओं के उत्पादन, विक्रय और वितरण।
आर्म्स एक्ट 1959, आयुध व गोला बारूद बनाना, विक्रय करना और परिवहन करना।
आमोद तथा पणकर अधिनियम 1979।
राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था और जीवन की गति को प्रभावित करने वाले अपराध।
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960।
उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम 2007।
अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम 2019 (बड्स एक्ट)।
उत्तराखंड निक्षेपक हित संरक्षण अधिनियम 2005।
उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम 2023।

यह भी पढ़े: उत्तराखंड परिवहन निगम में हुए बम्पर तबादले

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